तकनीकी चिट्ठा

आपके जीवन के तकनीकी पहलुओं को छूने की कोशिश

वर्डप्रेस को स्थानीय पीसी पर स्थापित करने के संभावित लाभ.

Posted by कमल on जून 25, 2007

यदि आप वर्ड प्रेस और वर्ड प्रेस डॉट कॉम का अंतर नहीं जानते हैं तो पंडित जी का ये लेख पढिये.

तो अब आप समझ गये होंगे कि जब हम वर्ड प्रेस को अपने कंप्य़ूटर में स्थापित करने की बात कर रहे हैं तो हम वर्ड प्रेस की बात कर रहे हैं ना कि वर्ड प्रेस डॉट कॉम की.हाँलाकि वर्ड प्रेस  डॉट कॉम वाले भी वर्ड प्रेस सॉफ्टवेयर ही उपयोग में लाते हैं लेकिन हो सकता है जो वर्जन वो लोग इस्तेमाल कर रहे हों वो डाउनलोड के लिये उपलब्ध ना हो या फिर उन्होने कुछ विशेष प्लगइंस का प्रयोग किया हो.

तो जैसा रवि जी ने जानना चाहा कि वर्डप्रेस को स्थानीय पीसी पर स्थापित करने के क्या क्या संभावित लाभ हो सकते हैं? तो इस लेख में आइये उसी की चर्चा करते हैं.

1. यदि आपने वर्ड प्रेस को अपने पीसी में स्थापित कर लिया है तो आप वर्ड प्रेस में हाथ साफ करने के किये स्वतंत्र है आप जब चाहें वर्ड प्रेस के अन्दर जाकर उसके विभिन्न फीचर्स को जांच सकते हैं. उसके लिये ना तो आपको इंटरनैट की आवश्यकता है ना एफ टी पी अकांउट की.

2. यदि आप अपने डोमेन पर वर्ड प्रेस की साइट या ब्लॉग चलाते हैं तो आप उस पर कोई भी प्रयोग तब तक नहीं कर सकते जब तक आप ये पूरी तरह सुनिश्चित ना कर लें कि उस प्रयोग से आपकी साइट पर कोई बुरा या विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा.इसलिये आप को स्थानीय पीसी पर वर्ड प्रेस चाहिये ताकि आप अपने सारे प्रयोग वहां कर सकें. तकनीक कि भाषा में चलती हुई साइट या ब्लॉग को प्रोडक्सन वातावरण कहा जाता है और वो जगह जहां आप नयी नयी चीजों का प्रयोग करते है ,किसी भी प्रकार की टैस्टिंग करते हैं उसे डैवलपमैंट वातावरण कहा जाता है. स्थानीय पीसी में वर्ड प्रेस स्थापित कर आप उसे डैवलपमैंट वातावरण में बदल सकते हैं. इंटरनैट पर वर्ड प्रेस के बहुत से प्लगइंस मुफ्त में उपलब्ध हैं आप उनको डाउनलोड कर उनका परीक्षण इस वातावरण में कर सकते है.

3.  आप अपने वर्ड प्रेस डॉट कॉम वाले चिट्ठे का बैक अप अपने स्थानीय पीसी में रख सकते हैं.

4. यदि आपको अपना चिट्ठा वर्ड प्रेस डॉट कॉम से अपने डोमेन में  शिफ्ट करना है तो उसके लिये भी स्थानीय पीसी में पहले टैस्टिंग की जा सकती है.

5. समय समय पर वर्ड प्रेस वाले अपने सॉफ़्टवेयर के नये वर्जन निकालते हैं जो आपको बीटा के रूप में उपलब्ध होते हैं आप उनकी टैस्टिंग भी अपने स्थानीय पीसी में कर सकते है.

6. यदि आपकी रुचि प्रोग्रामिंग में है तो आप स्वयं भी वर्ड प्रेस की थीम या प्लगइन बना सकते हैं.आपके स्थानीय पीसी में वर्ड प्रेस का पूरा सोर्स कोड उपलब्ध रहता है.

तो आपने देखा कि वर्ड प्रेस को स्थानीय पीसी में स्थापित करने के कितने फायदे हैं.आशा करता हूँ आपको ये लेख पसंद आया होगा.

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कैसे करें जूमला को लोकल पी.सी. में स्थापित

Posted by कमल on जून 24, 2007

पिछ्ली पोस्ट में आपको बताया था कि कैसे वैम्प (विंडोज,अपाची,माई सीक्यूएल,पीचपी) को अपने पी सी में स्थापित करें.

यदि आपके पीसी में वम्प सर्वर स्थापित हो गया है तो फिर आप जूमला आसानी से स्थापित कर सकते हैं.

सबसे पहले जूमला सोफ्टवेयर को यहां से डाउनलोड कर लें. ये एक जिप फाइल है. इसे वैम्पसर्वर की “www” डायरेक्टरी में एक नयी डायरकटरी बना कर एक्स्ट्रेक्ट कर लें. सामान्यत: यह C:\wamp\www में होगी.

अब वैम्प को चालू करें इसके लिये “start Wampserver” पर क्लिक करें.आपकी ट्रे में एक आइकॉन आ जायेगा जैसा कि पिछ्ले लेख में बताया गया था.

अपना वैब ब्राउजर (इंटरनैट एक्सप्लोरर, मोजिला फायरफॉक्स या ओपेरा) खोलें.ऎड्रेस बार में localhost टाइप करें.

WAMP_Localhost

आपकी स्क्रीन पर चित्र की भांति एक स्क्रीन खुल जायेगी.

अब फिर Your projects के नीचे joomla पर क्लिक करें.

अब चित्र की भाति आगे बढ़ते रहें.

Joomla_install_ 1

(2)

Joomla_install_ 2

(3)

Joomla_install_ 3

(4)

Joomla_install_ step2

(5)

Joomla_install_ step3

(6)

Joomla_install_ step4

(7)

Joomla_install_ final

और अब आप http://localhost/joomla को खोलेंगे तो ये दिखायी देगा.

Joomla_install_ final1

तो लीजिये स्थापित हो गया जूमला भी.

जूमला के बारे में अन्य जानकारियां आप प्राप्त करेंगे आने वाले लेखों में.

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कैसे करें वर्डप्रेस को लोकल पी.सी. में स्थापित – भाग 1

Posted by कमल on जून 24, 2007

मैने ये चिट्ठा शुरु तो किया था कि नियमित रूप से तकनीकी जानकारी आप लोगों के साथ बांटता रहुंगा..पर नियमित हो नहीं पा रहा है..कारण ऑफिस की व्यस्तताऎं.इन्ही व्यस्तताऑं के चलते मैं रवि जी से किया वादा भी पूरा नहीं कर सका. कुछ दिनों पहले मैथिली जी कि का एक ई-पत्र आया जिसमें मुझसे कुछ लिखने का आग्रह था, तो आज उन्ही के आग्रह पर लिख रहा हूँ.वो चाहें तो इस लेख को कैफे हिन्दी में भी छाप सकते हैं.

अपने पिछ्ले लेख में मैने वर्ड प्रेस से ब्लौगर पर अपने पोस्ट को कॉपी करने का तरीका बताया था.उसी की प्रतिक्रिया में डा: प्रभात टंडन की प्रतिक्रिया आई जिससे पता चला कि उनके लिये ये नयी जानकारी थी और कुछ मेल भी आयी जिनमें पूछा गया कि वर्ड प्रेस से बैक अप कैसे लें या कैसे वर्ड प्रेस को अपने कंप्यूटर में स्थापित करें. 

मुझे लगा कि शायद कम लोगों को इस बात की जानकारी है कि कैसे वर्डप्रेस को अपने लोकल कंप्यूटर में स्थापित करें हाँलाकि सर्वर पर वर्डप्रेस को स्थापित करने का तरीका सर्वज्ञ में दिया हुआ है पर वो एक तो सर्वर के लिये है और दूसरा थोड़ा अधूरा सा लगता है.

वर्ड प्रेस को स्थापित करने कि लिये आइये पहले कुछ मूल बातों को समझने का प्रयास करें.

वेब सर्वर : वेब सर्वर को हम दो भागों में देख सकते हैं.
1. वो मशीन जिसमें वेब सर्वर को स्थापित किया जाता है.
2. वो सोफ्टवेयर जो वेब सर्वर की तरह काम करता है.

वेबसर्वर सोफ्टवेयर वो सोफ्टवेयर है जो वेब पेज सर्व करता है अर्थात ऎसा सोफ्टवेयर जो वेब पेजों को आप तक पहुंचाता है.सामान्यत: वे वेब पेज HTTP प्रोटोकॉल द्वारा आप तक पहुंचाये जाते है. किसी भी कंप्यूटर में आप वेब सर्वर का सोफ्टवेयर स्थापित कर और उसे इंटरनैट से जोड़ कर आप उसे अंतरजाल पर वेब पेज प्रदान करने वाले वेब सर्वर में बदल सकते हैं. हम जो भी वेब पेज अंतरजाल पर देखते हैं वे हमारे पास किसी ना किसी वेब सर्वर के द्वारा ही पहुंचाये जाते हैं. यदि हम अपने कंप्यूटर पर केवल सोफ्टवेयर स्थापित करें और उसे इंटरनैट से ना जोड़े तो भी वो पूरा वेब सर्वर है जो कि केवल लोकली आप के लिये काम करेगा.वेब सर्वर के लिये बहुत से सोफ्टवेयर हैं जैसे माइक्रोसोफ्ट का आई आई एस , अपाची,नैटस्केप आदि .इनमे से कुछ कॉमर्शियल सोफ्टवेयर हैं तो कुछ मुफ्त. अपाची मुफ्त और मुक्त सोफ्टवेयर है और अंतरजाल पर उपस्थित बहुत सी साइट्स इसी पर स्थापित हैं.

डाटाबेस : एक ऎसा सोफ्टवेयर जिसमें आप अपने डाटा रखते हैं. कुछ उदाहरण हैं ऑरेकल,एस क्यू एल सर्वर (इसे सीक़्यूएल भी बोला जाता है), माई एस क्यू एल, पोस्टग्रेस एस क्यू एल आदि. इसमें से माई एस क्यू एल और पोस्टग्रेस एस क्यू एल मुफ्त और मुक्त हैं.

प्रोग्रामिंग भाषा (लैंग्वेज): जब भी हम वेब पेज देखते हैं तो वो हमारे सामने जिस भाषा के रूप में आता है वो एच टी एम एल (HTML) है. लेकिन कई बार इस एच टी एम एल को बनाने के लिये किसी प्रोग्रामिंग भाषा का प्रयोग किया जाता है.ऎसा अक्सर उन वेब पेजों में होता है जो स्टैटिक ना हो के डायनामिक होते हैं यानि जो वेब पेज हमेशा एक से नहीं रहते वरन प्रयोक्ता (य़ूजर)  के अनुरूप या समयानुसार बदलते रहते हैं. इस सभी पेजों में एच टी एम एल रन टाइम या उपयोग के समय बनती बदलती है.  वेब पेजों को बनाने के लिये बहुत सी भाषाओं का प्रयोग होता है. इनमे से प्रमुख है ए एस पी , जे एस पी , पी एच पी , पर्ल इत्यादि.

वर्ड प्रेस को अपने लोकल कंप्यूटर में स्थापित करने के लिये आपको एक वेब सर्वर , एक डाटाबेस पी एच पी प्रोगामिंग वातावारण और वर्ड प्रेस सोफ्टवेयर की आवश्यकता होती है.आप सोच रहे होंगे कि इतनी सारी चीजों के लिये तो आपको कंप्यूटर एक्सपर्ट होना पड़ेगा लेकिन आप को चिंतित होने या कंप्यूटर एक्सपर्ट होने की कोई जरूरत नहीं है.. इस लेख को पढ़िये और आसानी से वर्डप्रेस को अपने कंप्यूटर में स्थापित करिये. ये लेख दो भागों में है. पहले भाग में आपको बताया जा रहा है कि किस प्रकार अपने कंप्यूटर को वर्ड प्रेस के लिये तैयार करें. चुंकि अधिकतर लोग विंडोज आपरेटिंग सिस्टम ही प्रयोग करते हैं इसलिये ये लिनक्स या अन्य किसी ऑपरेटिंग सिस्टम का प्रयोग करने वालों के लिये नहीं हैं. ( उन्मुक्त जी क्षमा करें.)

सबसे पहले वैम्प नामक सोफ्टवेयर को यहां से डाउनलोड करें. वैम्प –> विंडोज, अपाची, माई सीक्यूएल और पी एच पी का संक्षिप्त रूप है.

—————————————————————————— WAMP5 is free to use (GPL licence).
(WAMP5 does not work with Windows 98, Me)

DOWNLOAD WAMP5 1.7.2      
Apache 2.2.4      
PHP 5.2.3 + PECL
SQLitemanager      
MySQL 5.0.41       
Phpmyadmin      
size : 21Mo
    

———————————————————————————-

21 मेबा की इस फाइल को डाउनलोड करने के बाद उस फाइल पर दो बार क्लिक कर उसे चला दें. और नीचे दिखाये चित्रों के अनुसार अपने कंप्यूटर पर वैम्प स्थापित करें.

Wamp_install_ 1

 

Wamp_install_ 2

Wamp_install_ 3

Wamp_install_ 4

 

Wamp_install_ 5

Wamp_install_ 6

 

Wamp_install_ 7

इस प्रकार से आपके कंप्यूटर पर वैम्प स्थापित हो जायेगा और

WAMP5 अपने आप Apache 1.3.31 ,PHP5, MySQL डाटाबेस ,PHPmyadmin and SQLitemanager आपके कंप्यूटर पर स्थापित कर देता है. WAMP5 आपके ट्रे आइकॉन पर एक सर्विस मैनेजर की तरह स्थापित हो जाता है जहां से आप सारी सर्विस मैनेज कर सकते हैं.

जब आप WAMP5 स्थापित करते हैं तो ये एक  “www” डाइरैक्टरी भी बनाता है जो कि आपका Document Root है यानि आप को भी वेब प्रोजेक्ट करेंगे वो इसी डाइरैक्टरी में करेंगे.

स्थापन के दौरान अपाची और माई सीक्यूएल सर्विस के तौर पर स्वत: स्थापित हो जाते हैं.

WAMP5 को देखने के लिये ट्रे आइकोन पर क्लिक करें.

ट्रे आइकॉन सर्विस की विभिन्न अवस्थाओं के बारे में बताता है :

 

यदि आप वैम्प को अपने कंप्यूटर से हटाना चाहें तो सारी सर्विस और फाईल भी आपके कंप्यूटर से स्वत: हट जाती है.

तो ये तो था वैम्प स्थापित करने का तरीका. अगले लेख में आपको वर्ड प्रेस स्थापित करने के बारे में बतायेंगे.

स्थापना के दौरान हुई किसी भी समस्या के बारे में टिप्पणी के द्वारा बतायें.

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वर्डप्रैस.कॉम से ब्लॉगर पर पोस्ट भेजना

Posted by कमल on मई 14, 2007

पंडित जी ने सुझाव दिया कि

“मेरा विचार है कि तकनीकी लेखन के लिए वर्डप्रैस.कॉम प्लेटफार्म उपयुक्त नहीं क्योंकि इसमें काफी बंदिशें हैं, इसीलिए मैंने वर्डप्रैस.कॉम से ब्लॉगर पर शिफ्ट किया था। इस बारे में मेरी यह पोस्ट पढ़ें।”

उनकी ये पोस्ट भी पढ़ ली और इसी बहाने और भी कई पोस्ट पढ़ डाली. लेकिन दुविधा खत्म नहीं हुई की क्या मेरे को शिफ्ट करना चाहिये कि नहीं. ब्लॉगर पर शिफ्ट करने के मेरे लिये जो कारण थे उनमें प्रमुख थे .

1. ले आउट को अपने हिसाब से बदलने की सुविधा.
2. काउंटर लगाने की सुविधा . ताकि आने जाने वालों का हिसाब रखा जा सके.
3. एड सेंस लगाने की सुविधा.

फिर प्रश्न उठा कि कैसे वर्ड प्रैस डॉट कॉम से ब्लॉगर में सारी पोस्ट ले जायी जायें.मैने बहुत ज्यादा पोस्ट तो लिखी ही नहीं है फिर भी तरीका तो ढूंढना ही था. हांलाकि पंडित जी बोल चुके थे कि ऎसा कोई स्वचालित (ऑटोमैटिक) तरीका नहीं है. आप को सारा काम मैनुअली करना पड़ेगा. लेकिन खोजबीन की तो एक तरीका मिल ही गया.

इस साईट से या यहाँ से आप सॉफ्टवेयर डाउनलोड कर लें.

ये सोफ्टेवेयर जावा में लिखा गया है.इसके लिये आपके कंप्यूटर में जावा वातावरण होना चाहिये.थोड़ी तकनीकी भाषा में कहें तो आपकी मशीन में JDK स्थापित होनी चाहिये.

क़ैसे करें जावा वातावरण स्थापित

पहले यहां से JDK डाउनलोड कर लें और फिर setup file चला दें.

capture0.jpg

इससे जावा वातावरण आप के कंप्यूटर में स्थापित हो जायेगा. इसे जांचने के लिये

Start –> run में जाके लिखें command .

एक काली स्क्रीन खुलेगी . उसमें लिखें

java –version

capture00.jpg

ये आपको कुछ उत्तर देगा. दिखाये गये चित्र की भांति. इसका मतलब है कि आप के कंप्यूटर में अब जावा वातावरण स्थापित हो गया है.

अब आप डाउनलोड की गयी फाइल blogsync-with-gui.tar.gz किसी ज़िप प्रोग्राम जैसे विनजिप या विन रार में खोल लें . इसके अन्दर आप को अन्य फाइलों के अलावा run.bat नामक फाइल मिलेगी. इसे डबल क्लिक कर के चला लें. चित्र में दिखायी गयी स्क्रीन दिखेगी.

capture2.jpg

पहले अपने वर्डप्रेस अकाउंट व ब्लॉगर अकाउंट से संबंधित जानकारी दें.

capture1.jpg

ब्लॉग आई डी पता करने के लिये अपने ब्लोगस्पॉट के डैशबोर्ड में जायें वहां आप अपना पता कुछ ऎसा देखेंगें .जैसे : http://www2.blogger.com/posts.g?blogID=37081298 यहाँ “37081298” आपकी ब्लॉग आई डी है.

वर्ड प्रेस की सारी पोस्ट पढ़ें (Read Posts from word press पर क्लिक करें) और इम्पोर्ट कर दें.

capture3.jpg

तो आपकी सारी पोस्ट ब्लॉगर में चलें जायेंगी. लेकिन इस विधि से केवल पोस्ट ही कॉपी होंगी . टिप्पणीयाँ आपको पंडित जी के बताये तरीके से ही कॉपी करनी पड़ेंगी.

मैने अपनी सारी पोस्ट यहाँ से यहाँ कॉपी की बिना किसी झंझट के.

क्या मेरे को ब्लॉगर में जाना चाहिये ?

इतना सब बताने के बाद आप कहेंगे कि ये कैसा प्रश्न. लेकिन ये प्रश्न मेरे दिमाग में उठा और मैने ये सोचा.

वर्ड प्रेस आपको अपना पोस्ट एक्स्पोर्ट या फिर इम्पोर्ट करने की सुविधा देता है जिससे आप अपनी सारी पोस्ट (टिप्पणीयों सहित) एक xml फाइल में डाउनलोड कर सकते हैं. इसका फायदा यह है कि आप अपने पूरे चिट्ठे को अपने कंप्यूटर में भी बैकअप के रूप में रख सकते है और कल के दिन यदि आप अपने डोमेन में जाँये तो आपको वहाँ सिर्फ वर्डप्रेस स्थापित करना होगा.बाकी का सारा चिट्ठा आप एक्सपोर्ट –इम्पोर्ट कर सकते हैं. य़े तरीका मेरे को ज्यादा सुरक्षित लगता है जहाँ मेरा चिट्ठे का पूरा कंट्रोल मेरे हाथ में है. ब्लॉगर ऎसी कोई भी सुविधा नहीं देता (अभी तक) और फिर आप ब्लॉगर में जावा स्क्रिपट वगैरह चला सकते हैं ये आपको थोड़ी सुविधा तो देता है पर ये आपके चिट्ठे को असुरक्षित भी बना देता है.

इसलिये मैने तो ये निर्णय लिया कि अभी फिलहाल वर्डप्रेस ही ठीक है. यदि आप लोगों का प्यार मिलता रहा तो भविष्य में अपना डोमेन ले के वहाँ शिफ्ट हो जायेंगे.

आपका क्या खयाल है ….

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औजार की कुछ और टैस्टिंग

Posted by कमल on मई 4, 2007

धन्य‌व‌ाद रवि जी और मैथिली जी .

ये समस्या विंडोज विस्टा की नहीं लगती वरन माइक्रोसौफ्ट ऑफिस 2007 की लगती है.

मैने इस औजार को विंडोज़ एक्स पी में इस्तेमाल किया . वहां भी आउटलुक 2007 और वर्ड 2007 में इसमें समस्या आई . विस्टा में यह कुछ लिख तो पा रहा था विंडोज़ एक्स पी में तो लिख भी नही पाया.

outlook_capture_xp.jpg

वर्ड में देखें

word_xp.jpg

फिर मैने इसे नोटपैड और वर्ड्पैड में इस्तेमाल किया तो दोनों जगह ठीक से चला यानि विस्टा में भी और एक्स पी में भी. तो समस्या ऑफिस की लगती है.

फ़ोनोटिक टूल में ये बरहा की तरह काम करता है . इंडिक आई ऎम ई की तरह नहीं .

जैसे इंडिक आई ऎम ई ‘अं” की मात्रा के लिये ^ का उपयोग होता है और बरहा में shift+m का . नया औजार shift+m ही लेता है .

मैथिली जी ने कहा कि ” य‌ह आप‌को ब‌स एक ब‌ार कैफेहिन्दी.क‌ाम विजिट क‌रने के लिये क‌ह‌त‌ा है. ब‌ाद में क‌भी भी न‌हीं. इसे फ्रीवेय‌र की श्रेणी में ही रखिये” . लेकिन ऎसा नहीं है मैथिली जी . य़े आप के प्रोग्राम फाईल या जहां भी आपने ये औजार रखा है वहां एक स्थायी एच टी एम एल फाईल डाल देता है (1) Activate करते समय ये आपको फिर से साईट की सैर कराता है (2) और जब भी आप इसे इस्तेमाल करते है तो ट्रे में आइकॉन बनाते समय भी कहता है visit….. (3) इतना ही नहीं जब आप इसकी सैटिंग में जाते है तो वहां आपको साइट का लिंक मिलता है (4) और सैटिंग पेज में किनारे पर भी क्लिक करने से ये आपको फिर से फ्री की सैर करवाता है (5). एक और साइट http://www.itbix.com/ का लिंक भी औजार में है (6). फिर भी यदि आप इसे ऎडवेयर ना कह फ्री-वेयर कहना चाहें तो ठीक है मेरे विचार से तो ये ऎडवेयर ही है.

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कैफ़े हिन्दी टाइपिंग औजार -मेरी प्रतिक्रिया

Posted by कमल on मई 4, 2007

आज रवि जी ने कैफ़े हिन्दी टाइपिंग औजार के बारे में बताया . आपको शायद ध्यान हो कुछ दिनों पहले ही मैथिली जी ने अपनी साइट कैफे-हिन्दी के बारे में बताया था . उनके पोस्ट पढ़कर तुरंत जिप फाइल को डाउनलोड किया . य़े एक utt नाम की ज़िप फाइल है जिसके अन्दर CafeHindi.Net नामक एक एम एस आई फाईल है .

मैं विन्डोज विस्टा अल्टीमेट का इस्तेमाल करता हूँ . जब मैने इसे स्थापित करने के लिये क्लिक किया तो पहली स्क्रीन पर ये काफी देर तक अटका रहा . मैने सोचा शायद ये विस्टा समर्थित नहीं होगा . लेकिन थोड़े देर में ये चल पड़ा . इसको स्थापित करने के बाद देखा तो पाया कि (बिना पूछे) कैफ़े हिन्दी टाइपिंग औजार के अलावा कैफ़े हिन्दी वैब साइट का लिंक भी आपके कंप्यूटर में स्थापित कर देता है.

अब इसको चलाया तो एक इसको Activate करने का बटन आया . Activate करने के बाद ये फिर कैफे इन्डिया की साइट में ले गया जहां इस औजार के साथ साथ पूरी की पूरी साइट भी थी.

इसको चालू करने के बाद पहले इसे आउटलुक 2007 में प्रयोग करने का प्रयास किया .

outlook_capture

(बढ़ा करने के लिये चित्र में चटका लगायें)

मैने “आज जब में कनाट प्लेस गया तो पाया कि देखो क्या होता है “ तो जो आया वो ऊपर वाले चित्र की दूसरी लाईन जैसा था . पहली लाईन मेरे इंडिक आई ऎम ई के द्वारा लिखी गयी है .

इसी लाईन को जब माइक्रोसोफ्ट वर्ड में लिखा तो देखिये क्या आया. (बढ़ा करने के लिये चित्र में चटका लगायें)

word1.jpg

माइक्रोसोफ्ट वर्ड में जब दूसरी बार लिखा कि “टाइप करना मुश्किल है भाई” तो देखिये क्या हुआ . पहली लाइन कैफे ओजार की है . दूसरी लाईन मेरे इंडिक आई ऎम ई की. (बढ़ा करने के लिये चित्र में चटका लगायें)

word2.jpg

मेरे विचार से अभी इस औजार को थोड़ा ठीक करने की आवश्यकता है .

एक और विचार आया कि जब ये औजार खुद ही कैफ़े हिन्दी वैब साइट का लिंक भी आपके कंप्यूटर में स्थापित कर देता है और अपने मीनू में भी एक ऑप्शन देता है visit cahehindi.com तो क्या इसे फ्री वेयर कहना उचित है या फिर इसे ऎडवेयर (Adware) कहा जाय ??

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कम्प्यूटर कर्मियों का कम काम

Posted by कमल on मई 2, 2007

पिछ्ली पोस्ट पर कई मित्रों ने अपनी टिप्पणीयां दी . आप सभी का हार्दिक धन्यवाद . श्रीश जी ने काफी अच्छे सुझाव दिये . उन पर भी अमल करुंगा .मेरी कोशिश तो रहेगी कि सप्ताह में कम से कम एक पोस्ट तो अवश्य लिखुं लेकिन ऑफिस के काम और ढेर सारे चिट्ठों को पढने के बाद लिखने के लिये कुछ समय ही नहीं मिल पाता पर कोशिश जारी है.

कुछ दिनों पहले पंकज जी ने सवाल उठाया कि कंप्यूटर वालों को इतने सारे पैसे क्यों मिलते है जिसके बारे में राजीव जी ने भी विस्तार से बताया और फिर पंकज जी भी उससे सहमत दिखे.

मेरा कंप्यूटर के क्षेत्र में लंबा अनुभव रहा है मेरा भी यही मानना है कि ऎसी स्थिति कमोबेश मांग और आपूर्ति वाली है . ये बात नहीं है कि कंप्यूटर वाले कुछ ज्यादा काम करते है ( हाँलांकि ज्यादा काम करने का अर्थ यह नहीं कि ज्यादा पैसा भी मिलना चाहिये ) अभी कुछ दिनों पहले U.S. Bureaus of Census and Labor Statistics की एक रिपोर्ट आयी है जिसके अनुसार अमरीका में कंप्यूटर कर्मी बांकी क्षेत्रों में काम करने वालों से कम काम करते हैं. ये तथ्य चौकाने वाले हैं ,कम से कम मेरे लिये . क्योकि मुझे लगता था कि हम लोग (कंप्यूटर वाले) ज्यादा काम करते हैं क्योकि काम के बीच में नैट सर्फिंग , चैटिंग , मेलिंग अधिकतर कंप्यूटर वाले ही करते हैं . यहां काम का अर्थ ऑफिस में समय बिताने से ही लिया जाय क्योकि अमरीकन संस्था ने भी इसे ही मुख्य आधार माना था.

आप भी परिणामों की एक झलक देखिये. (सारे समय औसत साप्ताहिक समय हैं और घंटे और मिनट में हैं )

प्रबंध ( मैनेजमेंट) : 46:24
कानून ( लीगल) : 44:54
आर्किटैक्ट/इंजीनियरिंग : 43:30
स्वास्थ सेवा : 43:06
कला/डिजाइन/मीडिया/खेल/मनोरंजन : 42:54
कम्यूनिटी / सामजिक सेवा : 42:54
कंप्यूटर/गणित : 42:24
शिक्षा/ट्रेनिंग/पुस्तकालय : 41:18

कंप्यूटर वालों के साथ जो गणित वाले इस श्रेणी में जोड़े गये है उनकी संख्या इस श्रेणी में 5 % से ज्यादा नहीं है. तो ये आंकड़े बताते है कि कितना कम काम करते है कंप्यूटर कर्मी.

अब इसका पैसे से क्या संबंध है ये तो नहीं मालूम पर ये आंकड़े जरूर कुछ मिथ्कों को तोड़ते हैं.

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मैं और हिन्दी लेखन .

Posted by कमल on अप्रैल 19, 2007

रवि जी ने कुछ रैगिंग लेने के अंदाज में पूछा …. “चलिए हमें बताएं कि आप इस चिट्ठे पर हिन्दी में कैसे लिखते हैं, सरल तरीका क्या है और यदि आप लिनक्स में हिन्दी लिखने का कोई सरल तरीका बता सकते हैं तो बताएं ” . ये रैगिंग भी थी और मेरी क्षमताओं को जानने की कोशिश भी.

रवि जी भले ही मुझे ना जानते हों पर मैं उन्हें जानता हूँ विभिन्न कंप्यूटर पत्रिकाओं में छ्पते उनके लेखों से. अभी इसी महीने “लिनक्स फॉर यू” में भी उनका लेख छ्पा है . उनका लिनक्स के हिन्दी-करण में भी काफी योगदान रहा है. तो वो यदि पूछें लिनक्स और हिन्दी के बारे में थोड़ा आश्चर्य होता है. ये सवाल तो मैने आपसे पूछ्ना है रवि जी. वैसे उन्मुक्त जी भी बता सकते हैं. जहां तक मेरा सवाल है मैं बताता हूँ अपने बारे में ( ज्ञानदत्त पाण्डे जी भी यही जानना चाहते हैं ).

मेरा कंप्यूटर और हिन्दी से बहुत पुराना नाता है. मैं चिट्ठाजगत ( हिन्दी और अंग्रेजी दोनों ) से अरसे से जुड़ा हुआ हूँ लेकिन सिर्फ एक पाठक की हैसियत से. इसलिये लगभग सभी को इस माध्यम से जानता हूँ. जहां तक हिन्दी की बात है हिन्दी मेरी मातृभाषा है . कंप्यूटर पर हिन्दी की जरूरत मुझे पड़ी सन 1996 में . मैं एक मैनुफेक्चरिंग कंपनी में काम करता था वहां हम लोग मजदूरों के लिये ट्रेनिंग मैनुअल बनाते थे जो कि हिन्दी में होते थे . ये सब उन दिनों बाहर से टाइप करवाने पड़ते थे. इसमें एक तो समय बहुत लगता था और फिर एक बार बनने के बाद उनको बदलना बहुत मुश्किल होता था .तो हम चाहते थे कि इसको कंप्यूटर में ले के आना . उस समय माइक्रोसोफट वर्ड उतना पॉपुलर नहीं था . हम लोग ‘एमि प्रो’ और ‘फ्री लांस ग्राफिक्स’ इस्तेमाल में लाते थे . उस समय किसी स्थानीय कंपनी से हमने कुछ सोफ्टवेयर लिया जो कि ‘रैमिंगटन क़ी बोर्ड’ पर चलता था. इसको इस्तेमाल करने मे काफी समस्या आती थी. अप्रेल 1998 (शायद) में चिप’ पत्रिका का पहला अंक आया था ( ये ‘चिप’ के ‘चिप-इंडिया’ बनने और ‘डिजिट’ के आने से काफी पहले की बात थी ) उसमें भारत-भाषा के प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी दी गयी थी और साथ में ‘शुशा’ फोंट भी थे . तब से ही में ‘शुशा’ फोंट इस्तेमाल करने लगा. बाद में संस्थान के लिये ‘अक्षर’ और ‘श्री-लिपि’ भी लिये जो आज भी कुछ विभागों में सफलता पूर्वक चल रहे हैं. जहां तक अंतरजाल (वैब) पर हिन्दी की बात है मैने अपनी पहली हिन्दी साइट 1998 में बनायी थी. उस समय वी.एस.एन.एल के डायल अप ऎकाउंट होते थे और वो सर्वर स्पेस देते थे आपको अपनी साइट होस्ट करने के लिये . उसी में अपनी साइट बनायी थी ‘शुशा फोंट’ इस्तेमाल करके जो केवल हमारे संस्थान के लोगों के लिये थी. मैने अपनी पर्सनल साइट 1999 में ‘एंजल फायर” में होस्ट की इसमें भी कुछ पेज हिन्दी के थे. फिर जियोसिटीज (geocities) में 2001 में अपनी साइट बनायी . उस समय जियोसिटीज (geocities) को याहू ने नहीं लिया था. उसी समय ई-ग्रुप्स में (जो कि अब याहू-ग्रुप है) अपना एक ग्रुप भी बनाया. मेरी साईट इसी ग्रुप की साईट थी. इसमें भी काफी पेज “शुशा’ में थे. लेकिन बाद में सदस्यों के कहने पर कुछ पेजों को ‘रोमनागरी’ में बदला ,क्योकि शुशा वाले पेजों को देखने के लिये फोंट डाउंलोड करना पड़ता था, और कुछ को पी.डी.एफ्. में. ये साइट आधे-अधूरे रूप में आज भी मौजूद है .

जहां तक लिनक्स का सवाल है लिनक्स का प्रयोग भी खूब किया लेकिन अधिकतर प्रयोग सर्वर पर ही किया डैक्सटौप पर नहीं . हम लोग ‘HP-Ux’ और ‘AIX’ पर काम करते थे तो ‘युनिक्स’ पर हाथ साफ था. सारे सर्वर युनिक्स पर ही थे. लिनक्स को जाना पी.सी.क़्यू. लिनक्स के माध्यम से और एक दो बार विंडोज पार्टीशन करने के चक्कर में अपने कीमती डाटा भी खो दिये . लिनक्स को डैस्क्टोप में केवल प्रयोग के लिये ही इस्तेमाल किया और लगभग सभी फ्लेवर पर काम किया . पी.सी.क़्यू. लिनक्स ,रैड हैट , सूसे , डैबियन , युबंटू और भी बहुत सारे . अपने संस्थान में लिनक्स को स्थापित किया . पूरा का पूरा मेल सिस्टम लिनक्स पर बदला . फायर-वाल के लिये पहले ‘चैक-पॉंईट’ और फिर ‘सूसे फायरवाल’ का प्रयोग किया , प्रोक्सी सर्वर के लिये ‘स्कविड’ का प्रयोग किया . ये सभी अभी भी मेरे पहले वाले संस्थान में सफलता पूर्वक चल रहे हैं .

जहां तक डैक्सटौप का सवाल है उसके लिये भी काफी प्रयास किया पर लिनक्स कभी भी मेरे पसंद का ओ.एस. नहीं बन पाया .वर्ड प्रोसेसिंग के लिये भी ‘मुक्त और मुफ्त’ विकल्प देखे. स्टार ऑफिस के व्यवसायिक होने से पहले उसे भी आजमाया और फिर ‘ओपन ऑफिस’ को भी . हाँलाकि मुझे तो ‘ओपन ऑफिस’ ठीक लगा पर मेरे संस्थान के लोगों के बीच नहीं चला . मुख्य कारण रही इसकी माइक्रोसौफ्ट वर्ड के साथ कम्पैटेबिलिटी . क्योकि अधिकतर लोग माइक्रोसौफ्ट वर्ड इस्तेमाल करते हैं और उनके द्वारा भेजी गयी सामग्री ओपन ऑफिस में कभी कभी नहीं खुलती.

जहां तक रही कम्प्यूटर पर मेरे हिन्दी लेखन की बात तो मैं माइक्रोसौफ्ट विस्टा और ऑफिस 2007 इस्तेमाल करता हूं . मैने विस्टा में ‘हिन्दी भाषा पैक’ और ऑफिस के लिये ‘इंडिक आई.एम.ई.’ लगा रखा है. कभी कभी बराहा भी इस्तेमाल कर लेता हूं. लिनक्स में यदि कभी हिन्दी का इस्तेमाल करना हो तो ऑनलाईन टूल इस्तेमाल कर लेता हूं. लिनक्स में आजकल फैडोरा और स्लेड (सुसे लिनक्स इंटरप्राइज डैस्कटौप 10 ) इस्तेमाल करता हूं.

इस चिट्ठे में मैं उन तकनीकी विषयों को छूना चाहता हूं जो कि एक संस्थान के लिये आवश्यक हैं और जिनके बारे में अभी भी हिन्दी चिट्ठा जगत में चर्चा नहीं होती जैसे ई.आर.पी, फायरवाल , नैटवर्किंग वगैरह वगैरह . हिन्दी कैसे लिखें बताने के लिये पंकज भाई का वीडियो है , सर्वज्ञ है , श्रीस श्रीश जी हैं और भी बहुत लोग हैं और फिर रवि जी तो हैं ही.

वैसे रवि जी आपका विंडोज विस्टा वाला लेख भी पढ़ा था उसमें आपने लिखा था कि विंडोज विस्टा में 3डी सपोर्ट है . मेरे हिसाब से ऎसा नहीं है . विंडोज विस्टा केवल एअरो इफेक्ट ही सपोर्ट करता है 3डी नहीं .ये तो अभी तक इनबिल्ट केवल लिनक्स में ही है.

शेष फिर…..

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इस चिट्ठे का प्रयोजन..

Posted by कमल on अप्रैल 17, 2007

नमस्कार पाठको !

इस चिट्ठे के माध्यम से मैं आप सब के सामने उन तकनीकी विषयों को रखना चाहता हूँ जो हमारे आम जिन्दगी को किसी ना किसी रूप में प्रभावित करते हैं या भविष्य में प्रभावित कर सकते हैं.

आप अपनी टिप्पणीयों के माध्यम से बता सकते हैं कि आप किन किन विषयों के बारे में जानना चाहते हैं .

तो प्रतीक्षा कीजिये अगली पोस्ट की..

कमल

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