Posted by कमल on May 4, 2007
धन्यवाद रवि जी और मैथिली जी .
ये समस्या विंडोज विस्टा की नहीं लगती वरन माइक्रोसौफ्ट ऑफिस 2007 की लगती है.
मैने इस औजार को विंडोज़ एक्स पी में इस्तेमाल किया . वहां भी आउटलुक 2007 और वर्ड 2007 में इसमें समस्या आई . विस्टा में यह कुछ लिख तो पा रहा था विंडोज़ एक्स पी में तो लिख भी नही पाया.

वर्ड में देखें

फिर मैने इसे नोटपैड और वर्ड्पैड में इस्तेमाल किया तो दोनों जगह ठीक से चला यानि विस्टा में भी और एक्स पी में भी. तो समस्या ऑफिस की लगती है.
फ़ोनोटिक टूल में ये बरहा की तरह काम करता है . इंडिक आई ऎम ई की तरह नहीं .
जैसे इंडिक आई ऎम ई ‘अं” की मात्रा के लिये ^ का उपयोग होता है और बरहा में shift+m का . नया औजार shift+m ही लेता है .
मैथिली जी ने कहा कि ” यह आपको बस एक बार कैफेहिन्दी.काम विजिट करने के लिये कहता है. बाद में कभी भी नहीं. इसे फ्रीवेयर की श्रेणी में ही रखिये” . लेकिन ऎसा नहीं है मैथिली जी . य़े आप के प्रोग्राम फाईल या जहां भी आपने ये औजार रखा है वहां एक स्थायी एच टी एम एल फाईल डाल देता है (1) Activate करते समय ये आपको फिर से साईट की सैर कराता है (2) और जब भी आप इसे इस्तेमाल करते है तो ट्रे में आइकॉन बनाते समय भी कहता है visit….. (3) इतना ही नहीं जब आप इसकी सैटिंग में जाते है तो वहां आपको साइट का लिंक मिलता है (4) और सैटिंग पेज में किनारे पर भी क्लिक करने से ये आपको फिर से फ्री की सैर करवाता है (5). एक और साइट http://www.itbix.com/ का लिंक भी औजार में है (6). फिर भी यदि आप इसे ऎडवेयर ना कह फ्री-वेयर कहना चाहें तो ठीक है मेरे विचार से तो ये ऎडवेयर ही है.
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Posted by कमल on May 4, 2007
आज रवि जी ने कैफ़े हिन्दी टाइपिंग औजार के बारे में बताया . आपको शायद ध्यान हो कुछ दिनों पहले ही मैथिली जी ने अपनी साइट कैफे-हिन्दी के बारे में बताया था . उनके पोस्ट पढ़कर तुरंत जिप फाइल को डाउनलोड किया . य़े एक utt नाम की ज़िप फाइल है जिसके अन्दर CafeHindi.Net नामक एक एम एस आई फाईल है .
मैं विन्डोज विस्टा अल्टीमेट का इस्तेमाल करता हूँ . जब मैने इसे स्थापित करने के लिये क्लिक किया तो पहली स्क्रीन पर ये काफी देर तक अटका रहा . मैने सोचा शायद ये विस्टा समर्थित नहीं होगा . लेकिन थोड़े देर में ये चल पड़ा . इसको स्थापित करने के बाद देखा तो पाया कि (बिना पूछे) कैफ़े हिन्दी टाइपिंग औजार के अलावा कैफ़े हिन्दी वैब साइट का लिंक भी आपके कंप्यूटर में स्थापित कर देता है.
अब इसको चलाया तो एक इसको Activate करने का बटन आया . Activate करने के बाद ये फिर कैफे इन्डिया की साइट में ले गया जहां इस औजार के साथ साथ पूरी की पूरी साइट भी थी.
इसको चालू करने के बाद पहले इसे आउटलुक 2007 में प्रयोग करने का प्रयास किया .

(बढ़ा करने के लिये चित्र में चटका लगायें)
मैने “आज जब में कनाट प्लेस गया तो पाया कि देखो क्या होता है “ तो जो आया वो ऊपर वाले चित्र की दूसरी लाईन जैसा था . पहली लाईन मेरे इंडिक आई ऎम ई के द्वारा लिखी गयी है .
इसी लाईन को जब माइक्रोसोफ्ट वर्ड में लिखा तो देखिये क्या आया. (बढ़ा करने के लिये चित्र में चटका लगायें)

माइक्रोसोफ्ट वर्ड में जब दूसरी बार लिखा कि “टाइप करना मुश्किल है भाई” तो देखिये क्या हुआ . पहली लाइन कैफे ओजार की है . दूसरी लाईन मेरे इंडिक आई ऎम ई की. (बढ़ा करने के लिये चित्र में चटका लगायें)

मेरे विचार से अभी इस औजार को थोड़ा ठीक करने की आवश्यकता है .
एक और विचार आया कि जब ये औजार खुद ही कैफ़े हिन्दी वैब साइट का लिंक भी आपके कंप्यूटर में स्थापित कर देता है और अपने मीनू में भी एक ऑप्शन देता है visit cahehindi.com तो क्या इसे फ्री वेयर कहना उचित है या फिर इसे ऎडवेयर (Adware) कहा जाय ??
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