तकनीकी चिट्ठा

आपके जीवन के तकनीकी पहलुओं को छूने की कोशिश

Archive for मई, 2007

वर्डप्रैस.कॉम से ब्लॉगर पर पोस्ट भेजना

Posted by कमल on मई 14, 2007

पंडित जी ने सुझाव दिया कि

“मेरा विचार है कि तकनीकी लेखन के लिए वर्डप्रैस.कॉम प्लेटफार्म उपयुक्त नहीं क्योंकि इसमें काफी बंदिशें हैं, इसीलिए मैंने वर्डप्रैस.कॉम से ब्लॉगर पर शिफ्ट किया था। इस बारे में मेरी यह पोस्ट पढ़ें।”

उनकी ये पोस्ट भी पढ़ ली और इसी बहाने और भी कई पोस्ट पढ़ डाली. लेकिन दुविधा खत्म नहीं हुई की क्या मेरे को शिफ्ट करना चाहिये कि नहीं. ब्लॉगर पर शिफ्ट करने के मेरे लिये जो कारण थे उनमें प्रमुख थे .

1. ले आउट को अपने हिसाब से बदलने की सुविधा.
2. काउंटर लगाने की सुविधा . ताकि आने जाने वालों का हिसाब रखा जा सके.
3. एड सेंस लगाने की सुविधा.

फिर प्रश्न उठा कि कैसे वर्ड प्रैस डॉट कॉम से ब्लॉगर में सारी पोस्ट ले जायी जायें.मैने बहुत ज्यादा पोस्ट तो लिखी ही नहीं है फिर भी तरीका तो ढूंढना ही था. हांलाकि पंडित जी बोल चुके थे कि ऎसा कोई स्वचालित (ऑटोमैटिक) तरीका नहीं है. आप को सारा काम मैनुअली करना पड़ेगा. लेकिन खोजबीन की तो एक तरीका मिल ही गया.

इस साईट से या यहाँ से आप सॉफ्टवेयर डाउनलोड कर लें.

ये सोफ्टेवेयर जावा में लिखा गया है.इसके लिये आपके कंप्यूटर में जावा वातावरण होना चाहिये.थोड़ी तकनीकी भाषा में कहें तो आपकी मशीन में JDK स्थापित होनी चाहिये.

क़ैसे करें जावा वातावरण स्थापित

पहले यहां से JDK डाउनलोड कर लें और फिर setup file चला दें.

capture0.jpg

इससे जावा वातावरण आप के कंप्यूटर में स्थापित हो जायेगा. इसे जांचने के लिये

Start –> run में जाके लिखें command .

एक काली स्क्रीन खुलेगी . उसमें लिखें

java –version

capture00.jpg

ये आपको कुछ उत्तर देगा. दिखाये गये चित्र की भांति. इसका मतलब है कि आप के कंप्यूटर में अब जावा वातावरण स्थापित हो गया है.

अब आप डाउनलोड की गयी फाइल blogsync-with-gui.tar.gz किसी ज़िप प्रोग्राम जैसे विनजिप या विन रार में खोल लें . इसके अन्दर आप को अन्य फाइलों के अलावा run.bat नामक फाइल मिलेगी. इसे डबल क्लिक कर के चला लें. चित्र में दिखायी गयी स्क्रीन दिखेगी.

capture2.jpg

पहले अपने वर्डप्रेस अकाउंट व ब्लॉगर अकाउंट से संबंधित जानकारी दें.

capture1.jpg

ब्लॉग आई डी पता करने के लिये अपने ब्लोगस्पॉट के डैशबोर्ड में जायें वहां आप अपना पता कुछ ऎसा देखेंगें .जैसे : http://www2.blogger.com/posts.g?blogID=37081298 यहाँ “37081298” आपकी ब्लॉग आई डी है.

वर्ड प्रेस की सारी पोस्ट पढ़ें (Read Posts from word press पर क्लिक करें) और इम्पोर्ट कर दें.

capture3.jpg

तो आपकी सारी पोस्ट ब्लॉगर में चलें जायेंगी. लेकिन इस विधि से केवल पोस्ट ही कॉपी होंगी . टिप्पणीयाँ आपको पंडित जी के बताये तरीके से ही कॉपी करनी पड़ेंगी.

मैने अपनी सारी पोस्ट यहाँ से यहाँ कॉपी की बिना किसी झंझट के.

क्या मेरे को ब्लॉगर में जाना चाहिये ?

इतना सब बताने के बाद आप कहेंगे कि ये कैसा प्रश्न. लेकिन ये प्रश्न मेरे दिमाग में उठा और मैने ये सोचा.

वर्ड प्रेस आपको अपना पोस्ट एक्स्पोर्ट या फिर इम्पोर्ट करने की सुविधा देता है जिससे आप अपनी सारी पोस्ट (टिप्पणीयों सहित) एक xml फाइल में डाउनलोड कर सकते हैं. इसका फायदा यह है कि आप अपने पूरे चिट्ठे को अपने कंप्यूटर में भी बैकअप के रूप में रख सकते है और कल के दिन यदि आप अपने डोमेन में जाँये तो आपको वहाँ सिर्फ वर्डप्रेस स्थापित करना होगा.बाकी का सारा चिट्ठा आप एक्सपोर्ट –इम्पोर्ट कर सकते हैं. य़े तरीका मेरे को ज्यादा सुरक्षित लगता है जहाँ मेरा चिट्ठे का पूरा कंट्रोल मेरे हाथ में है. ब्लॉगर ऎसी कोई भी सुविधा नहीं देता (अभी तक) और फिर आप ब्लॉगर में जावा स्क्रिपट वगैरह चला सकते हैं ये आपको थोड़ी सुविधा तो देता है पर ये आपके चिट्ठे को असुरक्षित भी बना देता है.

इसलिये मैने तो ये निर्णय लिया कि अभी फिलहाल वर्डप्रेस ही ठीक है. यदि आप लोगों का प्यार मिलता रहा तो भविष्य में अपना डोमेन ले के वहाँ शिफ्ट हो जायेंगे.

आपका क्या खयाल है ….

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औजार की कुछ और टैस्टिंग

Posted by कमल on मई 4, 2007

धन्य‌व‌ाद रवि जी और मैथिली जी .

ये समस्या विंडोज विस्टा की नहीं लगती वरन माइक्रोसौफ्ट ऑफिस 2007 की लगती है.

मैने इस औजार को विंडोज़ एक्स पी में इस्तेमाल किया . वहां भी आउटलुक 2007 और वर्ड 2007 में इसमें समस्या आई . विस्टा में यह कुछ लिख तो पा रहा था विंडोज़ एक्स पी में तो लिख भी नही पाया.

outlook_capture_xp.jpg

वर्ड में देखें

word_xp.jpg

फिर मैने इसे नोटपैड और वर्ड्पैड में इस्तेमाल किया तो दोनों जगह ठीक से चला यानि विस्टा में भी और एक्स पी में भी. तो समस्या ऑफिस की लगती है.

फ़ोनोटिक टूल में ये बरहा की तरह काम करता है . इंडिक आई ऎम ई की तरह नहीं .

जैसे इंडिक आई ऎम ई ‘अं” की मात्रा के लिये ^ का उपयोग होता है और बरहा में shift+m का . नया औजार shift+m ही लेता है .

मैथिली जी ने कहा कि ” य‌ह आप‌को ब‌स एक ब‌ार कैफेहिन्दी.क‌ाम विजिट क‌रने के लिये क‌ह‌त‌ा है. ब‌ाद में क‌भी भी न‌हीं. इसे फ्रीवेय‌र की श्रेणी में ही रखिये” . लेकिन ऎसा नहीं है मैथिली जी . य़े आप के प्रोग्राम फाईल या जहां भी आपने ये औजार रखा है वहां एक स्थायी एच टी एम एल फाईल डाल देता है (1) Activate करते समय ये आपको फिर से साईट की सैर कराता है (2) और जब भी आप इसे इस्तेमाल करते है तो ट्रे में आइकॉन बनाते समय भी कहता है visit….. (3) इतना ही नहीं जब आप इसकी सैटिंग में जाते है तो वहां आपको साइट का लिंक मिलता है (4) और सैटिंग पेज में किनारे पर भी क्लिक करने से ये आपको फिर से फ्री की सैर करवाता है (5). एक और साइट http://www.itbix.com/ का लिंक भी औजार में है (6). फिर भी यदि आप इसे ऎडवेयर ना कह फ्री-वेयर कहना चाहें तो ठीक है मेरे विचार से तो ये ऎडवेयर ही है.

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कैफ़े हिन्दी टाइपिंग औजार -मेरी प्रतिक्रिया

Posted by कमल on मई 4, 2007

आज रवि जी ने कैफ़े हिन्दी टाइपिंग औजार के बारे में बताया . आपको शायद ध्यान हो कुछ दिनों पहले ही मैथिली जी ने अपनी साइट कैफे-हिन्दी के बारे में बताया था . उनके पोस्ट पढ़कर तुरंत जिप फाइल को डाउनलोड किया . य़े एक utt नाम की ज़िप फाइल है जिसके अन्दर CafeHindi.Net नामक एक एम एस आई फाईल है .

मैं विन्डोज विस्टा अल्टीमेट का इस्तेमाल करता हूँ . जब मैने इसे स्थापित करने के लिये क्लिक किया तो पहली स्क्रीन पर ये काफी देर तक अटका रहा . मैने सोचा शायद ये विस्टा समर्थित नहीं होगा . लेकिन थोड़े देर में ये चल पड़ा . इसको स्थापित करने के बाद देखा तो पाया कि (बिना पूछे) कैफ़े हिन्दी टाइपिंग औजार के अलावा कैफ़े हिन्दी वैब साइट का लिंक भी आपके कंप्यूटर में स्थापित कर देता है.

अब इसको चलाया तो एक इसको Activate करने का बटन आया . Activate करने के बाद ये फिर कैफे इन्डिया की साइट में ले गया जहां इस औजार के साथ साथ पूरी की पूरी साइट भी थी.

इसको चालू करने के बाद पहले इसे आउटलुक 2007 में प्रयोग करने का प्रयास किया .

outlook_capture

(बढ़ा करने के लिये चित्र में चटका लगायें)

मैने “आज जब में कनाट प्लेस गया तो पाया कि देखो क्या होता है “ तो जो आया वो ऊपर वाले चित्र की दूसरी लाईन जैसा था . पहली लाईन मेरे इंडिक आई ऎम ई के द्वारा लिखी गयी है .

इसी लाईन को जब माइक्रोसोफ्ट वर्ड में लिखा तो देखिये क्या आया. (बढ़ा करने के लिये चित्र में चटका लगायें)

word1.jpg

माइक्रोसोफ्ट वर्ड में जब दूसरी बार लिखा कि “टाइप करना मुश्किल है भाई” तो देखिये क्या हुआ . पहली लाइन कैफे ओजार की है . दूसरी लाईन मेरे इंडिक आई ऎम ई की. (बढ़ा करने के लिये चित्र में चटका लगायें)

word2.jpg

मेरे विचार से अभी इस औजार को थोड़ा ठीक करने की आवश्यकता है .

एक और विचार आया कि जब ये औजार खुद ही कैफ़े हिन्दी वैब साइट का लिंक भी आपके कंप्यूटर में स्थापित कर देता है और अपने मीनू में भी एक ऑप्शन देता है visit cahehindi.com तो क्या इसे फ्री वेयर कहना उचित है या फिर इसे ऎडवेयर (Adware) कहा जाय ??

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कम्प्यूटर कर्मियों का कम काम

Posted by कमल on मई 2, 2007

पिछ्ली पोस्ट पर कई मित्रों ने अपनी टिप्पणीयां दी . आप सभी का हार्दिक धन्यवाद . श्रीश जी ने काफी अच्छे सुझाव दिये . उन पर भी अमल करुंगा .मेरी कोशिश तो रहेगी कि सप्ताह में कम से कम एक पोस्ट तो अवश्य लिखुं लेकिन ऑफिस के काम और ढेर सारे चिट्ठों को पढने के बाद लिखने के लिये कुछ समय ही नहीं मिल पाता पर कोशिश जारी है.

कुछ दिनों पहले पंकज जी ने सवाल उठाया कि कंप्यूटर वालों को इतने सारे पैसे क्यों मिलते है जिसके बारे में राजीव जी ने भी विस्तार से बताया और फिर पंकज जी भी उससे सहमत दिखे.

मेरा कंप्यूटर के क्षेत्र में लंबा अनुभव रहा है मेरा भी यही मानना है कि ऎसी स्थिति कमोबेश मांग और आपूर्ति वाली है . ये बात नहीं है कि कंप्यूटर वाले कुछ ज्यादा काम करते है ( हाँलांकि ज्यादा काम करने का अर्थ यह नहीं कि ज्यादा पैसा भी मिलना चाहिये ) अभी कुछ दिनों पहले U.S. Bureaus of Census and Labor Statistics की एक रिपोर्ट आयी है जिसके अनुसार अमरीका में कंप्यूटर कर्मी बांकी क्षेत्रों में काम करने वालों से कम काम करते हैं. ये तथ्य चौकाने वाले हैं ,कम से कम मेरे लिये . क्योकि मुझे लगता था कि हम लोग (कंप्यूटर वाले) ज्यादा काम करते हैं क्योकि काम के बीच में नैट सर्फिंग , चैटिंग , मेलिंग अधिकतर कंप्यूटर वाले ही करते हैं . यहां काम का अर्थ ऑफिस में समय बिताने से ही लिया जाय क्योकि अमरीकन संस्था ने भी इसे ही मुख्य आधार माना था.

आप भी परिणामों की एक झलक देखिये. (सारे समय औसत साप्ताहिक समय हैं और घंटे और मिनट में हैं )

प्रबंध ( मैनेजमेंट) : 46:24
कानून ( लीगल) : 44:54
आर्किटैक्ट/इंजीनियरिंग : 43:30
स्वास्थ सेवा : 43:06
कला/डिजाइन/मीडिया/खेल/मनोरंजन : 42:54
कम्यूनिटी / सामजिक सेवा : 42:54
कंप्यूटर/गणित : 42:24
शिक्षा/ट्रेनिंग/पुस्तकालय : 41:18

कंप्यूटर वालों के साथ जो गणित वाले इस श्रेणी में जोड़े गये है उनकी संख्या इस श्रेणी में 5 % से ज्यादा नहीं है. तो ये आंकड़े बताते है कि कितना कम काम करते है कंप्यूटर कर्मी.

अब इसका पैसे से क्या संबंध है ये तो नहीं मालूम पर ये आंकड़े जरूर कुछ मिथ्कों को तोड़ते हैं.

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